वर्जित इच्छाओं की सड़क पर काव्य अभिव्यक्ति


अमेजन प्राइम पर बहुचर्चित बेवसीरिज ”मीरजापुर“ के कारण, उत्तरप्रदेश राज्य का एक शहर अचानक से लोगों के जुबान पर चढ़ गया। वह शहर जिसको अंग्रेजी हुकूमत से कलकत्ता और दिल्ली के बीच व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया। साहित्यक गलियारे में ”मीरजापुर“ जनपद वर्जित इच्छाओं की सड़क(कविता संग्रह) के कारण चर्चा के केंद्र में है, जिसकी लेखिका है अनुराधा ओस। मौजूदा दौर के तमाम कविता संग्रह के बीच में ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ जो 2022 में प्रकाशित हुई है बोधि प्रकाशन से, धीरे-धीरे पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट जगह बना रही हैं। अनुराधा ओस ने, जिस तरह स्त्री अस्मिता उसके श्रम, उसके सौन्दर्य, प्रकृति-प्रेम और मानवीय नज़रिये को अपने कविता संग्रह ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ में कमोबेश 50 कविताओं में अभिव्यक्त किया है,
वह अब तक प्रकाशित हुए कविता संग्रहों से, थोड़ी अलहदा है। अनुराधा ओस ने, मानों स्त्री मन के अभिलाषाओं को, स्त्री जीवन की पीड़ा/वेदनाओं को, स्त्री जीवन पर पितृसत्ता के तमाम उलाहनों को, स्त्री श्रम के तमाम उपेक्षाओं को ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ बिखेर कर रख दिए है ज़ेहन में ठहर जाने वाली संवेदनाओं के साथ। कविता संग्रह में अनुराधा ओस अपने काव्य-अभिव्यक्ति में स्त्री जीवन के परंपरागत छवियों को तोड़ना भी चाहती है और स्त्री जीवन में मौजूद यथास्थिति को बदलने के लिए प्रेरित भी करती है।
अनुराधा ओस ने स्त्री जीवन के जिस अंतस-भाव और अनुभवों को पकड़ा है, वह हर स्त्री के जीवन का मूल भाव-पीड़ा है, जो पहले भी साहित्य के कई विधाओं में अभिव्यक्त होकर सतह पर आती रही है। ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ कविता संग्रह में जो अलग है वह देशज़ शब्दों के प्रयोग के साथ उसकी सहज़ अभिव्यक्ति, बिना लाग-लपेट दो टूक में कही गई यथार्थवादी भावना। जिसके केंद्र में केवल महिलाएं ही नहीं है, ग्रामीण जीवन कठोर सामाजिक यर्थाथ भी है, भीड़ के अंतिम आदमी के प्रति संवेदना भी है, हिंसा से चिंतित होकर मानवीयता का पक्ष भी है, जो छोटी-छोटी परंपरागत चीजों से अपनी ऊर्जा समेटती और जीवन पथ पर संघर्ष के लिए खुद को तैयार भी करती है। जाहिर है कवियत्री अनुराधा बोस का रचना संसार मानवीय जीवन के बहुरंगी पक्ष को एक बड़े कैनवाश पर केवल उढ़ेलना भर नहीं चाहती है, उसकी एक सार्थक चित्र उकेरना चाह्ती है, जो सत्य के करीब रहे।
अनुराधा ओस ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ कविता संग्रह में मानवीय सरोकार के जिस विविध वैविध्य को अपना विषय बनाया है, या उससे जुड़कर जो अभिव्यक्ति उन्होंने दी है, वह निरंतर चलने वाली एक यात्रा है। जो समय और अनुभव के आंच में पककर कुंदन के समान अधिक निखर कर, पाठकों को समृद्ध करेगी। हिंदी साहित्य के काव्य-धारा को अनुराधा ओस के ”वर्जित इच्छाओं की सड़क“ कविता-संग्रह में ….सोच लेती हैं औरतें, स्त्रियां और पलाश, बारिश में भीगती लड़कियां, खलिहर औरतें, जुल्फ को लहराने दो, वेश्याओं का कुआं, उस स्त्री के बारे में जैसी कविताएं जरूरी पढ़नी चाहिए। यह कविता केवल स्त्री अस्मिता को सतह पर लाकर नहीं पटकती है, अपनी शर्तों पर जीवन के वसंत का आनंद लेने की घोषणाएं भी करती है, अपनी खुदमुख्तारी की घोषणा भी करती है।

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।