"महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य: अनदेखा न करें!"

महिलाओं में मानसिक तनाव का बढ़ता स्तर घर, काम और सामाजिक दबाव के कारण महिलाएँ डिप्रेशन का शिकार होती हैं।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव  कारण कई महिलाओं को गहरी उदासी या एंग्जाइटी होती है।

"परफेक्ट महिला" का दबाव माज की उम्मीदें पूरी करने की कोशिश में महिलाएँ खुद को नजरअंदाज कर देती हैं।

भावनाएँ दबाने की आदत "लड़कियों को धैर्य रखना चाहिए" जैसी सोच के कारण महिलाएँ अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर पातीं।

शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा मानसिक प्रभाव पीसीओएस, थायराइड या मेनोपॉज जैसी समस्याएँ मूड स्विंग्स और डिप्रेशन को ट्रिगर कर सकती हैं।

"Women's Mental Health: Don't Ignore!".

"Women's Mental Health: Don't Ignore!".

डोमेस्टिक वायलेंस और मानसिक प्रभाव रेलू हिंसा महिलाओं में आत्मविश्वास की कमी  पैदा करते हैं

सोशल मीडिया और तुलना का दबाव "दूसरों की जिंदगी" देखकर अपने आप को कम आंकना, जिससे लो सेल्फ-एस्टीम और एंग्जाइटी होती है।

मदद लेने में झिझक "लोग क्या कहेंगे?" के डर से महिलाएँ थेरेपी या काउंसलिंग नहीं लेतीं।

क्या करें? समाधान के उपाय खुलकर बात करें, सेल्फ-केयर को प्राथमिकता दें, हेल्पलाइन: 181 यूज़ करें और मदद लेने में संकोच न करें।