एक बात मुझे अक्सर खटकती थी, ‘हमारे साथ लड़कियां इतनी कम क्यों है हर क्लास में?” कहीं सात, कहीं चार…
हर घर की छत, मुंडेर, या खुले मैदान से आती “वो कांटा!”, “अरे पकड़ो!”, “ढ़ील दे!” जैसी मस्ती भरी आवाज़ें,…
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