Rajiv Ranjan

जीवन के चौथे दशक में। कुछ पढ़ा-लिखा और घुमा-फिरा। उम्र के अलग-अलग पड़ावों पर शहर बदलते रहे और अनुभव भी । भाषा-बोली और मन-मिजाज भी । इन सबने रचा है मुझे । फिलहाल, शिक्षक की भूमिका में। भाषा,समाज और संस्कृति में दिलचस्पी । समाज, पर्यावरण और संस्कृति के रिश्तों को लेकर ऊहापोह की आदत और छिटपुट लेखन । ब्लॉग लेखन ( बाकी पहचान लेखनी की जुबान से... https://samaysamvad.blogspot.in/
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