भारत ही नहीं एशिया की पहली महिला ट्रेन पायलट हैं सुरेखा यादव, जानें इनकी इंस्पायरिंग कहानी


लड़किया-औरतें यह काम नहीं कर सकती, वह काम उसके बस का नहीं है जैसे कमेट्स करने वाले समाज में सुरेखा यादव एक बेमिसाल प्रेरणास्त्रोत हैभारतीय रेल के इतिहास में पहली महिला रेल चालक के रूप में सुरेखा यादव का नाम दर्ज था, अब उनके नाम के साथ ”सेमी-हाई स्पीड“ ट्रेन वंदेभारत चलाने की उपलब्धि भी दर्ज हो गई है। यह आधी आबादी के इतिहास में गर्व के साथ-साथ प्रेरणाओं से भरी कहानी भी है। सुरेखा यादव ने बीते सोमवार को महाराष्ट्र के सोलापुर स्टेशन और मुंबई में छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस(सीएसमटी) के बीच वंदेभारत ”सेमी-हाई स्पीड“ ट्रेन का संचालन किया।
कौन है सुरेखा यादव

बचपन से ही सुरेखा यादव को छुक-छुक करती रेलगाड़ी से लगाव था। चालक के पद के लिए 1986 में हुई लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में सफल हुई। बाद में कल्याण प्रशिक्षण स्कूल में सहायक चालक के तौर पर नियुक्त हुई। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 1986 में वे नियमित सहायक चालक के पद पर पदोन्नत हुई। साल 2000 में मोटर महिला के पद पर उनकी पदोन्नति हुई। उसे बाद 2011 में वे एक्सप्रेस/मेल की चालक बनी। उन्होंने अपनी उपलब्धियों के लिए अब तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार भी जीते है।
आसान नहीं था यह सफर
जब सुरेखा यादव ने यह कमान संभाली थी तो यह आसान सफर तो कतई नहीं रहा होगा। तब से आज तक कमोबेश 50 से ज्यादा महिलाएं इस पेशे में आ चुकी हैं। इतना ही नहीं, सुरेखा से सार्वजनिक वाहनों में महिला सुरक्षा को बढ़ाने के दिशा में जो सुझाव भी दिए हैं जिसकी अपनी महत्ती भूमिकाएं रही है।
महिला यात्रिओं को ईव टींजिंग और छेड़छाड़ का शिकार होते देखकर सुरेखा यादव के सुझाव से आज मेट्रों, महानगरों के लोकल ट्रेनों में पहला डिब्बा महिलाओं के लिए और कई महानगरों में विमन ओनली बसें चल रही है।
मुंबई की पहली “लेडीज स्पेशल” ट्रेन चलाने का गौरव भी सुरेखा यादव के पास है। उनके इस शुरुआती सफर में उनकी मां का सहयोग किया। सुरेखा यादव ने रेलवे ड्राइवर के अपने इंटरव्यू में कहा था, “ट्रेन तो एक मशीन है,उसे नहीं पता होता है कि उसके पीछे कौन बैठा है। ये समाज द्दारा विभाजित किए गए काम महिलाओं को हमेशा कम आंकते रहे है।”

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।