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“ऑफिसर ऑन ड्यूटी” पुलिस फोर्स में नैतिकता के टकराव की कहानी है

आज के समय में मलयालम फिल्मों का क्रेज बढ़ रहा है। मजबूत कहानी के साथ मलयालम फिल्में दर्शकों के दिलों पर राज कर रही हैं। मलयालम सिनेमा ने पुलिस, क्राइम, स्स्पेस और थ्रिलर पर पर कई बेहतरीन फिल्में हाल के दिनों में देखने को मिली भी है जैसे पिछले दिनों सोनी लिव पर रिलीज हुई रेखाचित्रम ने भी दर्शकों को काफी पसंद आई।

फिल्म का मुख्य किरदार, एक ईमानदार पुलिस अधिकारी, अपने सहकर्मियों और उच्च अधिकारियों के साथ टकराव में आ जाता है, जब वह एक संवेदनशील मामले की जांच करता है। इस प्रक्रिया में, उसे न केवल बाहरी दबावों का सामना करना पड़ता है, बल्कि उसे अपने अंदर के संघर्ष और द्वंद्व से भी जूझना पड़ता है।

फिल्म में पुलिस विभाग के अंदर की राजनीति, सत्ता संघर्ष, और नैतिकता के प्रश्नों को गहराई से उठाया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे एक ईमानदार अधिकारी को अपने कर्तव्य और नैतिकता के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

“ऑफिसर ऑन ड्यूटी” एक थ्रिलर और ड्रामा फिल्म है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सही है और क्या गलत, खासकर तब जब व्यवस्था और व्यक्तिगत नैतिकता के बीच टकराव हो।

अब एक कॉप थ्रिलर ने दस्तक देकर दर्शकों को इंप्रेस कर दिया है। यह फिल्म पहले दिन अच्छा कलेक्शन करने में कामयाब रही। बॉलीवुड फिल्म छावा की आंधी के बीच भी ऑफिसर ऑन ड्यूटी का बॉक्स ऑफिस पर राज रहा।फिल्म की कहानी बहुत ही ज्यादा इंटरेस्टिंग है जिसमें आपको समाज में हो रहे क्राइम को खत्म करने के लिए बने पुलिस ऑफिसर खुद क्राइम के जाल में फंसे हुए देखने को मिलेंगे।

अगर आप भी सस्पेंस थ्रिलर जोनर की फिल्में देखने की शौकीन है तो यह फिल्म सिर्फ आपके लिए ही बनी है जिसे आप एक बार जरूर ट्राई कर सकते हैं अच्छे एक्सपीरियंस के लिए।

फिल्म के सभी कलाकारों के साथ मेकर्स का बहुत ही अच्छा काम देखने को मिलेगा। जीतू अशरफ द्वारा निर्देशित ये फिल्म जिसकी कहानी लिखी है शाही कबीर ने, फिल्म में आपको कुंचाको बोबन, जगदीश, मनोज केयू,उन्नी लालू, रमज़ान मोहम्मद, श्रीकांत मुरली, विशाख नायर और प्रियामणि जैसे कलाकारों की एक्टिंग देखने को मिलेगी।

कहानी क्या है?

कहानी एक पुलिस ऑफिसर से शुरू होती है जिसका नाम हरिशंकर (कुंचाक्को बोबन) दिखाया गया है। फिल्म में दिखाए गए इस लीड रोल कैरेक्टर की दुनिया उस समय पूरी तरह से बदल जाती है जब ऑफिसर को एक आभूषण चोरी के केस को इन्वेस्टिगेट करने के लिए भेजा जाता है। सर्किल इंस्पेक्टर हरिशंकर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पत्नी गीता और बेटी के साथ कोच्चि में रहता है। वह सख्त और अनुशासित है और अपनी टीम से भी यही उम्मीद करता है।

कहानी की शुरुआत हरिशंकर द्वारा नकली सोने के आभूषणों के मामले की जांच से होती है। उसकी खोज उसे घोटाले के मुख्य संदिग्धों में से एक चंद्रबाबू तक ले जाती है। लेकिन जैसे ही उसे लगता है कि वह करीब पहुंच रहा है, उसे अप्रत्याशित रूप से एक POCSO मामला मिल जाता है, जिससे चीजें और भी जटिल हो जाती हैं और जांच कहीं अधिक बड़ी और गहन हो जाती है।

इस केस को सुलझाते सुलझाते ऑफिसर के सामने ऐसी नई -नई परतें खुलती हैं कि कोई भी ऑफिसर बिना इन परतों की तह तक जाये नहीं रह पाएगा और ठीक ऐसा ही फिल्म में दिखाया गया ऑफिसर भी करता है।जिसमें कई मिस्ट्री थ्रिलर और सस्पेंस से भरे महिला उत्पीड़न के केस देखने को मिलते हैं जिसके बाद इस पुलिस ऑफिसर को ही इन केसों में उलझा दिया जाता है वह भी इस तरह से की हर तरफ से पुलिस ऑफिसर ही दोषी दिखता है। आगे क्या होगा, क्या ये पुलिस ऑफिसर अपने ऊपर लगे इलज़ामो से छुटकारा पायेगा या नहीं यह सब जानने के लिए आपको इस फिल्म को देखना होगा।

फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी

फिल्म में सस्पेंस और थ्रिलर उस लेवल का दिखाया गया है जो दृश्यम जैसी फिल्मों को भी पीछे छोड़ देगा। फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ही बेहतरीन है जिसे देखकर आपको मजा आएगा।

फर्स्ट हाफ आपको पूरी तरह से इंगेज कर लेगा जिसके कंपैरिजन में सेकंड हाफ एक तो जगह पर आपको बोरियत फील करा सकता है लेकिन उसके बावजूद सभी कैरेक्टर्स और कहानी इतनी ज्यादा इंगेजिंग है कि आप फिल्म को बीच में छोड़ने के लिए नहीं सोच सकते है। यह एक फैमिली फ्रेंडली फिल्म है जिसे आप अपनी फैमिली के साथ इंजॉय कर सकते हैं।

फिल्म में पुलिस वाले का अमानवीय कृत्य है जो इस कहानी में जघन्य अपराधों की एक श्रृंखला को जन्म देता है। इसी तरह, हरिशंकर को भी एक दोषरहित चरित्र के रूप में चित्रित नहीं किया गया है। ऐसे दौर में जब स्क्रीन पर पुलिस अधिकारियों को अक्सर अतीत के दुखों से दबा हुआ देखा जाता है, ‘ऑफिसर ऑन ड्यूटी’ इस ट्रॉप को अपनाने से नहीं कतराता।

वह अनुमोदन नहीं मांगता, न ही वह माफ़ी मांगता है। उसका परिचय उसे सीमा रेखा के प्रतिकारक प्रकाश में चित्रित करता है, जो अधीनस्थों पर झपटता है और बिना किसी हिचकिचाहट के हिंसा का सहारा लेता है।

थोड़े सिनेमाई अंत के अलावा, ऑफिसर ऑन ड्यूटी के बारे में बाकी सब कुछ पूरी तरह से मनोरंजक है।अगर आप भी सस्पेंस थ्रिलर जोनर की फिल्में देखने की शौकीन है तो यह फिल्म सिर्फ आपके लिए ही बनी है जिसे आप एक बार जरूर ट्राई कर सकते हैं अच्छे एक्सपीरियंस के लिए। फिल्म के सभी कलाकारों के साथ मेकर्स का बहुत ही अच्छा काम देखने को मिलेगा। 

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