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महिला क्रिकेट के नये दौर का आगाज़ है विमेंस आईपीएल…

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पहले महिला प्रीमियर लीग की शुरुआत भारतीय महिला क्रिकेट ही नहीं, विमेन्स एथलीट की तस्वीर बदलने की उम्मीद पैदा कर दी है। बेशक, इससे क्रिकेट में रूचि लेने वाली देश की असंख्य लड़कियों को ही नहीं, विमेन्स एथलीट को भी आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा और नए अवसर भी खुलेगे….

आईपीएल के कमोबेश डेढ़ दशक बाद महिला प्रीमियर लीग के आगाज से भारतीय महिला क्रिकेट की तस्वीर बदलने वाली, ऐसा कई जानकारों का मानना है। भारतीय महिला क्रिकेट ने तमाम खिलाड़ीयों ने सीमित संसाधनों में अंतराष्ट्रीय क्रिकेट के हर फारमेंट में अपना श्रेष्ठ प्रर्दशन किया है। परंतु, उनके खाते में बड़ी वैश्विक उपलब्धियां अभी भी नहीं है। दूसरी तरफ, विश्व भर में आस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट का दबदबा कायम है, जो अभी तक बिखरा नहीं है।

विमेंस क्रिकेट आईपीएल में कुल पांच टीमों में दुनियाभर के कुल 87 महिला क्रिकेटर भाग ले रही है। जिसमें सबसे मंहगा दांच स्मृति मंधाना और दीप्ति शर्मा पर लगाया गया है। विमेंस आईपीएल जैसा मंच संघर्ष करती हुई महिला क्रिकेटरों के लिए कितना जरूरी मंच बन पाता है इसका पता लीग खत्म होने के बाद चलेगा। शोपियां की जासिया अख्तर, जिनको  आतंकियों ने  पीटा था पूनम खेमनर, जिसको परिवार से ही विरोध झेलना पड़ा था। दैविका वैद्य,कोविड में मां को खोने के बाद खेल छोड़ने का मन बन लिया था। सोनम यादव,जो फैक्ट्री मजदूर की बेटी है। जैसे खिड़ालियों पर सबकी नज़र रहेगी क्योंकि यहां तक उनके पहुंचने के संघर्ष में कई बड़ी बाधाओं को पार किया है। विमेंस आईपीएल ने देश ही नहीं विदेशी खिलाड़ियों को भी नया मंच दिया है।

भारत में पीवी सिंधु, विनेश फोगाटा, मनिका बत्रा और निकहत जरीन जैसे कई महिला एथलिटों ने देशभर में कई लड़कियों के लिए खेल के मैदान का दरवाजा खोल दिया है। अब घर के लोग भी बेटियों को भी खेल में जाने देने लगे है। इस महौल में विमेंस आईपीएल की शुरुआत, आनेवाले दिनों में कई नई कहानियां लिखने  जा रहा है।……..

Pratyush Prashant

किसी भी व्यक्ति का परिचय शब्दों में ढले, समय के साथ संघर्षों से तपे-तपाये विचार ही दे देते है, जो उसके लिखने से ही अभिव्यक्त हो जाते है। सम्मान से जियो और लोगों को सम्मान के साथ जीने दो, स्वतंत्रता, समानता और बधुत्व, मानवता का सबसे बड़ा और जहीन धर्म है, मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने वर्तमान और भविष्य में भी इन चंद उसूलों के जीवन जी सकूंगा और मानवता के इस धर्म से कभी मुंह नहीं मोड़ पाऊगा।

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